जनजातीय उप-योजना के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा…

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को बोला कि आदिवासियों ने मातृभूमि और इसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा की रक्षा के लिए बहुत सारे बलिदान दिए हैं. साथ ही उन्होंने अन्य लोगों से सतत विकास हासिल करने के लिए उनके उदाहरण से सीखने की अपील की.

राष्ट्रपति भवन में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के सदस्यों के साथ वार्ता के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने शिक्षा के महत्व पर ज्यादा जोर देते हुए उन्हें अहमियत देने का आग्रह किया.

राष्ट्रपति भवन ने एक बयान में बोला कि राष्ट्रपति ने सभी 75 पीवीटीजी के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की और बोला कि उनमें से कई पहली बार अपने गांवों से बाहर निकले हैं.उन्होंने पीवीटीजी समुदाय का समर्थन करने के लिए गवर्नमेंट के प्रयासों जैसे एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में आरक्षित सीटों के प्रावधान और राष्ट्रीय फैलोशिप और विदेशी छात्रवृत्ति योजना पर प्रकाश डाला. राष्ट्रपति मुर्मू ने पीवीटीजी स्त्रियों को जनजातीय स्त्री सशक्तिकरण योजना सहित विभिन्न योजनाओं का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

बयान में बोला गया, “राष्ट्रपति ने बोला कि आदिवासी समाज के लोगों ने मातृभूमि और इसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा की रक्षा के लिए बहुत बलिदान दिया है. सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम सभी आदिवासी समाज से सीख सकते हैं.”

जनजातीय उप-योजना के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने बोला कि 41 मंत्रालय और विभाग अपने बजट का एक हिस्सा पीवीटीजी सहित जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित करते हैं. उन्होंने पीवीटीजी के विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएम पीवीटीजी विकास मिशन के शुरुआत पर प्रसन्नता व्यक्त की. राष्ट्रपति मुर्मू ने 2047 तक सिसिकल सेल एनीमिया रोग (असामान्य हीमोग्लोबिन के कारण होने वाली रक्त की एक आनुवंशिक विकार) को समाप्त करने के लिए मौजूदा बजट में घोषित अभियान के महत्व पर भी प्रकाश डाला.

उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण सहयोग के लिए पद्म पुरस्कार प्रदान करने वाले आदिवासी समुदायों के प्रतिभाशाली व्यक्तियों की सराहना की. राष्ट्रपति ने कहा, यह सभी नागरिकों, विशेष रूप से पीवीटीजी सहित आदिवासी लोगों का कर्तव्य और महत्वाकांक्षा है कि वे अपनी पहचान बनाए रखते हुए और अपने अस्तित्व की रक्षा करते हुए उनका विकास सुनिश्चित करें.

 

हिंदुस्तान में विशेष रूप से 75 कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की पहचान की गई है, जो राष्ट्र में सबसे अधिक वंचित और कमजोर जनसंख्या में से हैं. इन पीवीटीजी की पहचान सामाजिक आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक विशिष्टता, भौगोलिक अलगाव और प्रौद्योगिकी के पूर्व-कृषि स्तर जैसे विशिष्ट मानदंडों के आधार पर की जाती है. सरकार उनकी विशिष्ट पहचान की रक्षा करने और उनकी स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान और लक्षित कल्याणकारी तरीका प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य उन्हें उत्पीड़न से बचाना है.

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