9 मई के बाद की स्थिति में पीटीआई के पास अपने पुनरुद्धार के लिए कोई रणनीति नहीं

इस्लामाबाद, 12 जून (आईएएनएस). 9 मई के बाद की स्थिति में पीटीआई के पास अपने पुनरुद्धार के लिए कोई रणनीति नहीं है. पार्टी इन्तजार करो और देखते रहो की नीति अपनाने के अतिरिक्त क्या करे, यह तय नहीं कर पा रही है. यह बात मीडिया रिपोटों में कही गई.
पीटीआई के वे नेता, जिन्होंने अभी तक पार्टी नहीं छोड़ी है और उनमें से ज्यादातर छिपे हुए हैं, उनका मानना है कि माइनस इमरान खान का मतलब माइनस पीटीआई होगा.
जूम के माध्यम से भाग लेने वाले ऐसे भरोसेमंद नेताओं की एक पार्टी की बैठक में इमरान खान को बताया गया कि उन्हें किसी भी माइनस वन फॉर्मूले को स्वीकार नहीं करना चाहिए.
बैठक में शामिल हुए पीटीआई के एक सूत्र ने बोला कि पार्टी के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी जूम सभा में शामिल नहीं थे.
यह पूछे जाने पर कि कुरैशी बैठक से गायब क्यों हैं, सूत्र ने हंसते हुए बोला कि चर्चा में सिर्फ वैचारिक नेता ही शामिल हुए., सूत्र ने कहा, बैठक में सर्वसम्मति से बोला गया वे किसी भी माइनस इमरान खान फॉर्मूले को स्वीकार नहीं करेंगे. यदि वे इमरान खान को माइनस करना चाहते हैं, तो उन्हें पूरी पीटीआई को माइनस करने दें.
इमरान खान ने बोला था कि उनके और पीटीआई के अतिरिक्त कोई भी राष्ट्र को मौजूदा आर्थिक दलदल से बाहर निकालने में सहायता नहीं कर सकता. प्रवासी पाकिस्तानियों को उन पर भरोसा होने का जिक्र करते हुए उन्होंने बोला था कि सत्ता में आने के बाद वह अरबों $ का निवेश सुनिश्चित कर सकते हैं. वे (विदेशी पाकिस्तानी) पीडीएम नेताओं और उनकी गवर्नमेंट पर कभी भरोसा नहीं करेंगे.
पार्टी सूत्र ने बोला कि इमरान खान ने उन लोगों की सराहना की है जो अभी भी उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने पार्टी नेताओं से बोला कि उनकी पत्नी – बुशरा बीबी ने भी उनका समर्थन किया और चट्टान की तरह दृढ़ रहीं.
हालांकि, पीटीआई के अंदरूनी सूत्रों से चर्चा से पता चलता है कि पार्टी के पास मौजूदा संकट से बाहर निकलने के लिए कोई रणनीति नहीं है. इन्तजार करो और देखते रहो ही एकमात्र नीति है. पीटीआई और उसके अध्यक्ष, जो अतीत में सड़क पर विरोध और लंबे मार्च के शौकीन रहे हैं, यह भी महसूस करते हैं कि 9 मई की घटनाओं ने पार्टी को गंभीर हानि पहुंचाया है, जिससे उसके समर्थकों को जुटाने के लिए शायद ही कोई स्थान बची है.
द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के दर्जनों नेता पहले ही पीटीआई छोड़ चुके हैं, कई सलाखों के पीछे हैं, जबकि कई छिपे हुए हैं. इस बात पर कोई स्पष्टता नहीं है कि छिपे हुए लोग कब तक छिपे रहेंगे.


